HOME|हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|आरती|
श्री बदरीनाथजी की आरती श्री विष्णु भगवान की आरती
विराट भगवान की आरती


आरती हिन्दू उपासना की एक विधि है
Aarti, ãrti, arathi, or ãrati is a Hindu ritual


27GOOG
विराट भगवान की आरती

हरिजू की आरती बनी।
अति विचित्र रचना रचि राखी, परति न गिरा गनी॥ हरिजू ..
कच्छप अध आसन अनूप अति, डांडी सहस फनी।
महि सराव, सप्त सागर घृत-बाती सैल घनी। हरिजू ..
रवि-शशि ज्योति जगत परिपूरन, हरति तिमिर रजनी।
उड़त फुल उड्डन नभ अन्तर, अंजन घटा घनी॥ हरिजू ..
नारदादि, सनकादि प्रजापति, सुर-नर-असुर अनी।
काल-कर्म-गुनओर-अंत नहिं, प्रभु-इच्छा रजनी॥ हरिजू ..
यह प्रताप दीपक सुनिरंतर, लोक सकल भजनी।
सूरदास सब प्रकट ध्यान में अति विचित्र सजनी॥

Translation - भाषांतर

N/A
27GOOG
References :
http://ind.jagran.com



Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2007-07-06T17:06:29.0000000Z

Comments | अभिप्राय