HOME|हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|आरती|
गजवदन विनायक की आरती श्री दुर्गा जी की आरती
श्री गणेश जी की आरती


आरती हिन्दू उपासना की एक विधि है
Aarti, ãrti, arathi, or ãrati is a Hindu ritual


41GOOG
श्री गणेश जी की आरती

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
लडुअन के भोग लागे, सन्त करें सेवा। जय ..
एकदन्त, दयावन्त, चार भुजाधारी।
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय ..
अन्धन को आंख देत, कोढि़न को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ जय ..
हार चढ़े, पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा।
सब काम सिद्ध करें, श्री गणेश देवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
विघ्न विनाशक स्वामी, सुख सम्पत्ति देवा॥ जय ..
पार्वती के पुत्र कहावो, शंकर सुत स्वामी।
गजानन्द गणनायक, भक्तन के स्वामी॥ जय ..
ऋद्धि सिद्धि के मालिक मूषक सवारी।
कर जोड़े विनती करते आनन्द उर भारी॥ जय ..
प्रथम आपको पूजत शुभ मंगल दाता।
सिद्धि होय सब कारज, दारिद्र हट जाता॥ जय ..
सुंड सुंडला, इन्द इन्दाला, मस्तक पर चंदा।
कारज सिद्ध करावो, काटो सब फन्दा॥ जय ..
गणपत जी की आरती जो कोई नर गावै।
तब बैकुण्ठ परम पद निश्चय ही पावै॥ जय .
श्री गणेशाय नम:
गणेश जी की महिमा
विस्तृत यज्ञों, स्तोत्रपाठों एवं नियमित पूजन में भी पहले

गणेश जी की पूजा करके ही मनुष्य संपूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त कर सकता है।
चतुर्थी को दिनभर उपवास करके श्री गणेश जी का पूजन करें तथा रात में अन्न ग्रहण करें।

Translation - भाषांतर

N/A
41GOOG
References :
http://ind.jagran.com


Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2007-07-06T18:10:23.0000000Z

Comments | अभिप्राय