- गीत और कविता
हिन्दी कवियोंने आधी शताब्दीसे भी अधिक लंबे समयतक उनकी रचनाकर्मसे आधुनिक हिन्दी कविता समृद्ध की है।
- ग्राम्या
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम नारी
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - कठपुतले
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - वे आँखें
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - गाँव के लड़के
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - वह बुड्ढा
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - धोबियों का नृत्य
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम वधू
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम श्री
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - नहान
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - गंगा
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - चमारों का नाच
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - कहारों का रुद्र नृत्य
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - कठपुतले
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - चरखा गीत
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - महात्माजी के प्रति
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - राष्ट्र गान
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम देवता
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - संध्या के बाद
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - खिड़की से
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - रेखाचित्र
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - दिवा स्वप्न
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - सौन्दर्य कला
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - स्वीट पी के प्रति
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - कला के प्रति
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - आधुनिका
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - मजदूरनी के प्रति
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - नारी
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - द्वन्द्व प्रणय
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - १९४०
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - सूत्रधर
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - संस्कृति का प्रश्न
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - सांस्कृतिक ह्रदय
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - भारत ग्राम
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - स्वप्न और सत्य
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - बापू !
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - अहिंसा
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - पतझर
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - उद्बोधन
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - नव इंद्रिय
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - कवि किसान
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - वाणी !
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - नक्षत्र
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - आँगन से
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - याद
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - गुलदावदी
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - विनय
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - स्वप्न पट !
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम कवि
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम दृष्टि
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम चित्र
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - ग्राम युवती
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - पनघट पर
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत - स्त्री
ग्रामीण लोगोंके प्रति बौद्धिक सहानुभूती से ओतप्रोत कविताये इस संग्रह मे लिखी गयी है। ग्रामों की वर्तमान दशा प्रतिक्रियात्मक साहित्य को जन्म देती ह..
- सुमित्रानंदन पंत
सुमित्रानंदन पंतकी कविताओं में प्रकृति और सौंदर्य के रमणीय चित्र मिलते हैं,तथा उनकी कविताओं में प्रगतिवाद और विचारशीलता भी है। उनकी रचनाये मानव ..
- सुमित्रानंदन पंत - परिचय
सुमित्रानंदन पंतकी कविताओं में प्रकृति और सौंदर्य के रमणीय चित्र मिलते हैं,तथा उनकी कविताओं में प्रगतिवाद और विचारशीलता भी है। उनकी रचनाये मानव कल..
- कविता संग्रह - चैती
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - कर्म की भाषा
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - असमंजस
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - पवन शान्त नहीं है
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - इच्छा
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - नन्हे
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - बात क्या है
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - झापस
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - रजनीगंधा
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - कातिक का पयान
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - क्षण की खिड़की
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - मधुमालती
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - कवि शमशेर से
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - अच्छाई
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - स्वर
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - हृदय की लिपि
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - अनुराग
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - वसंत
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - अधिभूत
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - टूटा हृदय
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - जो है सो है
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - घटना
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - दुखों की छाया
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - पयोद और धरणी
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - कठिन यात्रा
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - आकांक्षा
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - प्रकाश के रंग
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - कला के अभ्यासी
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - विनिमय
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - मार्ग
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - सारनाथ
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - विपर्याय
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - कह नहीं सकता
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - ऐसा ही था
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- कवी त्रिलोचन - मैं कृतज्ञ हूँ
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- त्रिलोचन
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- त्रिलोचन - परिचय
कवि त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है।
- प्र.के.अत्रे - ( एक शोकपर्यवसायी कथा) ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - " कोठुनि हे आले येथें? ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - 'आम्ही कोण?' म्हणून काय प...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - का सुंदरि , धरिसि आज असा ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - भाजी मंडइतूनि घेउनि घरा ह...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - ओळख होता पहिल्या दिवशी , ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - अयि नरांग -मल -शोणित -भक्...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - शाई , कागद , टांक , रूळ ,...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - ' कुठे जासी?' वा, काव्य...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - परिटा येशिल कधि परतून ? ॥...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - होतीस तू त्या दिनी बैसली ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - चित्रपटिंच्या हे कुशल नट...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - भाउजी - चल जपून अगदी वहि...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - तू छोकरी , नहि सुन्दरी । ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - शृंगाररस काव्याचे निज ब...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - बोले हासुनि कारकून कुठला ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - दावा हो कोणी दावा , मम ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - चाफा बोलेना । चाफा चालेना...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - अहा , सजवुनी लालतांबडा मु...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - थांबीव एकदा सारंगी ही चल ...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, चरित्र ..
- प्र.के.अत्रे - बागेतुनि वा बाजारातुनि कु...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - तो आला जवळी नि कानगुजला क...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - तू आलीस बघावया सहज 'त्या...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - मना , नीट पंथे कधीही न जा...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - माडीच्या खिडकीमधे कवि कुण...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - जेव्हा काव्य लिहावयास जगत...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - धोंडो - (जांभई देत ) का...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - अहा , उगवली आनंदाची शुभमं...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - धाव पाव देवा आता । देई एक...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - बायको आली आज परतून ! ॥ध्र...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- प्र.के.अत्रे - दे रे हरि , दोन आण्याची म...
प्रल्हाद केशव अत्रे (१३ऑगस्ट १८९८ - १३ जून १९६९) हे मराठीतील नावाजलेले लेखक, कवी, नाटककार, मराठी व हिंदी चित्रपट निर्माते, चित्रपट कथाकार, ..
- बा.भ.बोरकर - संग्रह १
बोरकरांच्या कवितेतून सृष्टीत आकंठ भरलेले सौंदर्य आणि संगीत प्रतीत होते, तसेच लौकिक पातळीवरील प्रेम आणि अलौकिक पातळीवरील भक्ती या दोहोंचा अनुभव यात..
- बा.भ.बोरकर
बोरकरांच्या कवितेतून सृष्टीत आकंठ भरलेले सौंदर्य आणि संगीत प्रतीत होते, तसेच लौकिक पातळीवरील प्रेम आणि अलौकिक पातळीवरील भक्ती या दोहोंचा अनुभव यात..
- बा.भ.बोरकर - परिचय
बोरकरांच्या कवितेतून सृष्टीत आकंठ भरलेले सौंदर्य आणि संगीत प्रतीत होते, तसेच लौकिक पातळीवरील प्रेम आणि अलौकिक पातळीवरील भक्ती या दोहोंचा अनुभव यात..
- ग. दि. माडगूळकर
ग.दि. माडगूळकर हे आधुनिक काळातील मराठी भाषेतील अग्रगण्य साहित्यिक होते.
- राम गणेश गडकरी
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - परिचय
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - वाचकांस विज्ञापन
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - माझी पहिली कविता
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - मोगर्याचा हार
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - कोठें असे सकलपंडितमुख्य भ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - तुज बघुनी वाटतें कीं भ्रम...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - धन्य पंढरी ! धन्य भीवर...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नट मित्रास पत्र
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - क्षणभर वेडया प्रेमा थांब ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जगतास जागवायाला केशवसुत ग...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अभिनंदन करितों प्रांजलि ।...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - आठवतो का सांग , सखे ! तो...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - रंग गुलाबी संध्या पसरी पश...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - क्षणैक भरतें भलतें वारें ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जें मनास शिवलें नाहीं । ठ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - रानोमाळ । आंधळ्यांची चा...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - कांहीं गोड फुलें सदा विहर...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - हें कोण बोललें बोला ? ’...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - वेडा कोणि जगास सोडुनि पळे...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - ही एक आस मनिं उरलि ॥...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - हृदयशारदे ! या कवनाने बो...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - चित्तकोकिला ! प्रेमा गाय...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - करमत नव्हते म्हणुनि एकदा ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - धन्य ! धन्य ! बा , तव स...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - वाजिवरे बाळा ! वेल्हाळा ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नाजुक सुंदर गोंडस चिमणी ब...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - चला आज हा आला दसरा ! पा...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नमोऽस्तु ते ! धन्य एक स...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - दूरस्था जलधीकडे स्वहृदया ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अहा ! उगवला पहा अरुण हा ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नीज गुणी बाळ झणीं शान्त ,...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - भीमकबाळा ती वेल्हाळा ट...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - होता एक जुनाट आड पडका , ओ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - पन्हाळगडचा पठार सगळा घ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - संध्यापट गगनीं पसरी । त...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - दयाघना ! विनति करित मन त...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - कोवळ्या हालत्या चिमण्या प...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - रमणि ! स्मरणीं आमरणचि या...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - चालतसे सारखीच ही मुशाफरी ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जीव बोलतो पाणी पाणी चि...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अनंत नभ हें वरी पसरलें न ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - देवी दर्शनदुर्लभ झाली आश...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - सुभाषित
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - थांब जरा , तारके ! जरा त...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - डोळ्यांनीं बघतों, ध्वनी ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - पाहसि आतां अंत असा कां ?...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जिवलग हृदया ! मूढ वृत्ति...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - क्षमा करी , जिवलगे ! क्ष...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जगीं सांगतात प्रीत पतंगाच...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - गिरिशिखरें खरतांना त्यांत...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - पिठांत पाणी घालुनि केलें ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अखेर झाली आतां ॥घे हा॥ प्...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - तुटे स्नेहसंबंध सर्वस्विं...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - चित्रपटावरि रम्याकृतिच्या...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अंधपणें मी पाहत होतों माझ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - सख्या ! सांगसी बोध हिताच...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अखंड गायन ऐकायातें पंजरां...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - चल , सख्या जिवा रे , पुन्...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - "निजलें जग; कां आतां इतक्...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - शहाजहानाआधीं मेली ख्यालिख...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - असे एकदां दोघे चौघे कामाल...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - श्रीहरि मथुरानगरीं गेले ,...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - सहजचि दिसलें पायाखालीं मज...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - सार्या त्या कविता तशाच अ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - यावज्जीवहि ’काय मी ’ न क...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - पदर आणिले तुझे कांहिं तूं...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नाहीं राहत वास -लेश कुसुम...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - काळोखामधुनी पल्याड न दिसे...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - प्रेमाचे ते जीव ॥ दयाळा ॥...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - आहे जो विधिलेख भालिं लिहि...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - " सुखदुःखांच्या द्वैतामधु...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अवेळ तरिही बोल , कोकिळे ,...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - शांत शांत अति बाह्यसृष्टि...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - प्रणयदर्शना जातां मित्रा ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - प्रेमा ! उठ ----चल उघड ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - चला चला रे चला चला ॥ विसर...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नाचतां मोर ॥ नाचते पहा ला...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जादूची माझी बाग तींत फ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - मंगल देशा ! पवित्र देशा ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - नमो पांडुरंगा ! नमस्ते श...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जगद्गायका बालकवे ! चल ,...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - पहा फडकला पूर्वदिशेवर ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - गा रे गा रे गाच जरा ॥ माझ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - कांहीं लिहावें तुझ्यासाठि...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - पंख उभारुनि जरा ॥ भरारा ॥...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - बाळ कुणीं । संध्याकाळीं र...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - खेळत होता बाळ आमुचा चेंडू...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - ये ये ये , आतां ये कविते ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - रचिसि काव्यभूषा ? अथवा क...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - धवाननालोकनचुंबनातें । लज...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - उन्हाळ्यासाठीं पाणी न ठेव...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - ज्याच्या बोध -सुधेनें पाव...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - अमृतसिद्धि हा योग मंगलचि ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - गुणि बाळ असा जागसि कां रे...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - यंत्रबंधनीं तिर्यजलातें अ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - कोणी एक कवि स्वकीय हृदया ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - संगीताची करी योजना विधि क...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - शब्दांमध्यें , अर्थांमध्य...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - समशेर दुधारी दिसतां । कां...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - मैना भटके वनांत । वेडा रा...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - जी दुःखी कष्टी जीवाम दुसर...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - ही सरती संध्या या सालाची ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- राम गणेश गडकरी - कौरव -पांडव -संगर -तांडव ...
राम गणेश गडकरींनी मराठी साहित्यात मोलाची भर घातली.
- गाणी व कविता
दररोजच्या जीवनातील गाणी.
Songs from everyday life of Marathi people.
- संग्रह १
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- चांदराती खाडीच्या किना-यावर
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- प्रीतिची हूल फुकट ना तरी !'
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- थांब थांब, बाले आतां------
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- स्मृती माझी परि नसे तुला बाई '
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- प्रेम आणि पतन
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- चटका
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- बाजू उलटली !
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- भावबंधन
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- एकलेपणाची आग
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- चंदाराणी
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- संध्यासंगीत
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- गुलाबांचा हार
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- एक स्वप्न
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- सावल्यांचे गाणें.
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- नि:श्वासगीत
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- ऐरण
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- एके रात्रीं
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- जोडपे
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- पंचप्राण
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- त्याचे गाणे
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- तिचे गाणे
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- चांदरात
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- रानगीत
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- खूळ
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- त्यांचें प्रेम
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- दैविकता
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- चिमुकल्यास
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- स्वर्ग दोनच बोटें उरला !
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- प्रीतीची त-हाच उलटी असे !
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- जेव्हां चिंतित
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- प्रीति
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- मीं म्हटलें गाइन १
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- मीं म्हटलें गाइन २
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- जइं भेटाया तुज
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- एक करुणकथा
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- प्रेमळ पाहुणा
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- दिवाळी, तो आणि मी
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- 31 डिसेम्बर १९२६ ची मध्यरात्र.
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- 31 डिसेम्बर १९२६ ची मध्यरात्र.
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- नळावर तणतणून भांडणार्या एका बाईस
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- एकाचे गाणें
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- माझे गाणें
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- दोन चुंबने
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- तिमदन
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- कोळ्याचें गाणे
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- बेगमेच्या विरहगीता'ला शिवाजीचें उत्तर
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- लग्नघरातील स्वयंपाकिणींचें गाणे
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- कवने
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- दोन देवभक्त
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- कोणि म्हणती
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- फासावरुन
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- मी करितों तुजवर प्रेम
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- चालली मिरवणुक
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- कागदी फुलें
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- मोरपिसें आणि कावळा
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- पतंगप्रीत
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- अनंत काणेकर
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- अनंत काणेकर परिचय
अनंत काणेकर यांच्या कवितेत, भावनेची उत्कटता, आणि तिचे प्रकटन होण्यासाठी अनुरूप अशी रससिद्ध भाषाशैली यांची एकजीव जुळणी झालेली आहे.
- विशाखा संग्रह १
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- दूर मनोर्यांत
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- हिमलाट
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- स्वप्नाची समाप्ति
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- ग्रीष्माची चाहूल
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- अहि नकुल
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- किनार्यावर
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- अवशेष
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- मातीची दर्पोक्ति
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- गोदाकाठचा संधिकाल
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- स्मृति
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- जालियनवाला बाग
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- जा जरा पूर्वेकडे
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- तरीही केधवा
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- मूर्तिभंजक
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- कोलंबसाचे गर्वगीत
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- आस
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- बळी
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- लिलाव
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- पृथ्वीचे प्रेमगीत
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- गुलाम
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- विशाखा संग्रह २
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- सहानुभूति
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- सात
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- माळाचे मनोगत
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- ऋण
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- उमर खैयाम
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- विजयोन्माद
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- शेवटचे पान
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- उषःकाल
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- तू उंच गडी राहसि
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- प्रीतीविण
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- नदीकिनारी
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- पाचोळा
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- बंदी
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- आव्हान
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- बायरन
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- प्रतीक्षा
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- आश्वासन
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- प्रकाश-प्रभु
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- मेघास
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- विशाखा संग्रह ३
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- भाव कणिका
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- ध्यास
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- निर्माल्य
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- जीवन लहरी
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- पावनखिंडीत
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- सैगल
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- कुतूहल
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- अससि कुठे तू
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- भक्तिभाव
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- नेता
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- बालकवि
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- वनराणी
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- देवाच्या दारी १
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- देवाच्या दारी २
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- देवाच्या दारी ३
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- टिळकांच्या पुतळ्याजवळ
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- समिधाच सख्या या
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- कुसुमाग्रज
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- कुसुमाग्रज परिचय
’कुसुमाग्रज’ या टोपणनावाने श्री. विष्णू वामन शिरवाडकर (१९१२-१९९९) यांनी मराठीत लेखन केले.
- मोरोपंत
केकावली हे उत्कृष्ट वीणाकाव्य तसेच ध्वनीकाव्य आहे. केकावलीतील मुख्य रस भक्ति असून करून रस त्याचा अंगभूत आहे.
- निरंजन माधव - काव्य स्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - मंत्ररामचरित
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - निर्वोष्टराघवचरित
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - स्वरुपानुभवाष्टक
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीनारायणाष्टकं
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीनारायणाष्टकं
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीहनूमंतस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - सांबशिवाष्टक
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - भवान्यष्टक
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीगोदावरीमानसपूजा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीभागीरथीस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - सांबशिवस्तुतिध्यान
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीसदगुरुस्तव
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीतुलसीस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - बनशंकरीस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - वासुदेव स्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीमल्लारीस्तोत्रराज
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीविठ्ठलस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - व्यंकटेशस्तोत्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीज्ञानेश्वराष्टक
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - पद संग्रह
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - आत्मचरित्र
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - उद्धार पहिला
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - उद्गार दुसरा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - उद्गार तिसरा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - उद्गार चवथा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - उद्गार पांचवा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - श्रीरामकर्णामृत
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - उत्तमपुरुषवर्णन
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - शौर्यवर्णन
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - प्रतापवर्णन
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - यशवर्णन
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- निरंजन माधव - सामर्थ्यवर्णन
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- निरंजन माधव - सदगुणवर्णन
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - धैर्यवर्णन
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - औदार्यवर्णन
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- निरंजन माधव - गांभीर्यवर्णन
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- निरंजन माधव - ऐश्वर्यवर्णन
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- निरंजन माधव - एकपत्नीव्रत
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- निरंजन माधव - सत्यवर्णन
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- निरंजन माधव - वैषम्यनैर्घृण्यपरिहार
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - भक्तोत्कर्ष
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- निरंजन माधव - नाममहिमा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - कृपाप्रसाद
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - महिमा
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- निरंजन माधव - प्रस्तावना
निरंजन माधवांच्या कवितेत काव्यस्फूर्ति उच्च दर्ज्याची असून भाषेत सरळपणा व प्रसाद सोज्वळ आहे.
- लिंबोळ्या - उत्कंठा !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - पुष्पांचा गजरा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - जकातीच्या नाक्याचे रहस्य !
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- लिंबोळ्या - वेळ नदीच्या पुलावर
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- लिंबोळ्या - बालयक्ष
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आजोळी
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- लिंबोळ्या - आजोबा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - डराव डराव !
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- लिंबोळ्या - मागणे
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- लिंबोळ्या - बगळे !
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- लिंबोळ्या - माझी बहीण
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- लिंबोळ्या - बाजार
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- लिंबोळ्या - मेघांनी वेढलेला सायंतारा
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- लिंबोळ्या - मानवीं तृष्णा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - बहरलेला आकाश-लिंब !
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- लिंबोळ्या - विचारविहग
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- लिंबोळ्या - भटक्या कवी !
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- लिंबोळ्या - वेताळ
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- लिंबोळ्या - नांगर
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- लिंबोळ्या - इंफाळ
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - गस्तवाल्याचा मुलगा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - रानफुले
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- लिंबोळ्या - सोनावळीची फुले
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- लिंबोळ्या - प्रचीति
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - ते आम्ही---!
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- लिंबोळ्या - दूर दूर कोठे दूर !
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- लिंबोळ्या - हे स्वतंत्र भारता
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- लिंबोळ्या - गुरुवर्य बाबूरावजी जगताप
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - अहो, खानदेशस्थ सन्मित्र माझे !
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- लिंबोळ्या - त्रिपुरी पौर्णिमा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कागदी नावा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - ध्येयावर !
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- लिंबोळ्या - प्रतिभा
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- लिंबोळ्या - जाईची फुले
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- लिंबोळ्या - लिंबोळ्या
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - प्रभो मी करीन स्फूर्तीने कूजन
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - किती तू सुंदर असशील !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - विराटस्वरुपा, ब्रम्हाण्डनायका----!
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कोण तू----?
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- लिंबोळ्या - लाडावले पोर----!
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- लिंबोळ्या - हवा देवराय, धाक तुझा !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - उजळेल माझे जीवन-सुवर्ण !
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- लिंबोळ्या - घरातच माझ्या उभी होती सुखे !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - तुझी का रे घाई माझ्यामागे ?
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - तुझ्या गावचा मी इमानी पाटील !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - देव आसपास आहे तुझ्या !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - देवा, माझे पाप नको मानू हीन !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - सर्व हे नश्वर, शाश्वत ईश्वर !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - अपूर्णच ग्रंथ माझा राहो !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कळो वा न कळो तुझे ते गुपित !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - देवा, तूच माझा खरा धन्वंन्तरी !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - नका करु मला कोणी उपदेश
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - वाळवंटी आहे बाळ मी खेळत !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - चिमुकले बाळ आहे मी अल्लड !
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- लिंबोळ्या - सुरेल वाजीव बन्सी पुन्हा !
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- लिंबोळ्या - कोण माझा घात करणार ?
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- लिंबोळ्या - केव्हाची मी तुझी पाहताहे वाट
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - प्रभो, तुझ्या एका मंगल नामात
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कोण मला त्राता तुझ्यावीण ?
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कृतज्ञ होऊन मान समाधान !
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- लिंबोळ्या - वल्हव वल्हव प्रभो, माझी होडी !
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- लिंबोळ्या - यापुढे मी नाही गाणार गार्हाणे
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आता भीत भीत तुला मी बाहत !
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- लिंबोळ्या - बाळ तुझे गेले भेदरुन भारी !
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- लिंबोळ्या - वसुंधरेवर खरा तू मानव !
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- लिंबोळ्या - भयाण काळोखी एक कृश मूर्ति !
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- लिंबोळ्या - पाउलापुरता नाही हा प्रकाश
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- लिंबोळ्या - सांगायाचे होते सांगून टाकले
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- लिंबोळ्या - उत्तम मानव वसुंधरेचा हा
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- लिंबोळ्या - युगायुगाचा तो जाहला महात्मा !
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- लिंबोळ्या - हरे राम ! किती पाहिला मी अंत !
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- लिंबोळ्या - स्वातंत्र्य म्हणजे ईश्वराचे दान !
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- लिंबोळ्या - फार मोठी आम्हा लागलीसे भूक !
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- लिंबोळ्या - आक्रोश, किंकाळ्या ऐकल्या मी !
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- लिंबोळ्या - आता हवे बंड करावया !
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- लिंबोळ्या - कोटिकोटि आम्ही उभे अंधारात
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - परदेशातून प्रगट हो चंद्रा !
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- लिंबोळ्या - अरे कुलांगारा, करंटया कारटया !
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- लिंबोळ्या - आपुलेच आहे आता कुरुक्षेत्र !
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- लिंबोळ्या - तोच का आज ये सोन्याचा दिवस ?
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- लिंबोळ्या - जगातले समर्थ !
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- लिंबोळ्या - नांदू द्या तुमची साम्राज्ये सुखात !
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- लिंबोळ्या - दोस्त हो, तुमची गोड भारी वाचा !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - हे फिरस्त्या काळा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - संस्कृतीचा गर्व
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - असा तू प्रवासी विक्षिप्त रे !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - रामराज्य मागे कधी झाले नाही
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आई मानवते
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - मानवाचा आला पहिला नंबर !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - जातीवर गेला मानव आपुल्या !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - अभागिनी आई
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आरंभ उद्यान, शेवट स्मशान
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आता भोवतात तुमचे ते शाप !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - यंत्रयुगात या आमुचे जीवित !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - अपूर्वच यंत्रा, तुझी जादुगिरी !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - असे आम्ही झालो आमुचे गुलाम !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - मार्ग हा निघाला अनंतामधून
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कोटि ब्रह्माण्डांची माय तू पवित्र
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - माउली
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - जुनेच देईल तुज तांब्यादोरी
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - निसर्ग
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - महात्म्याची वृत्ति आपुल्या पावित्र्ये
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - धन्य नरजन्म देऊनीया मला
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - दूर कोठेतरी
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - माझिया जीवनसृष्टीच्या ऋतूंनो !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - क्षितिजावरती झळक झळक !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - फार थोडे आहे आता चालायचे !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - शिशिराचा मनी मानू नका राग
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आपुले मन तू मोठे करशील
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कुणी शिकविले
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - लुटा हो लुटा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - खरा जो कुणबी
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - चाळीसाव्या वाढदिवशी
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कुटुंब झाले माझे देव
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - वाटसरू
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - शुद्ध निरामय
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - सहज
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - स्वप्न
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - एकतारी
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - पाखरास
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - पिंजरा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - अपराध
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - नाटकी मी
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आई
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - तुमच्या प्रेमाची हवी मला जोड !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - नाही मज आशा उद्याच्या जगाची !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - सांत्वन
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - तिळगूळ
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - आता निरोपाचे बोलणे संपले
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - बळ
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - नाहीतर उरी फुटशील !
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - कुर्हाडीचा दांडा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - उमर खय्यामा
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- लिंबोळ्या - गायक
’ लिंबोळ्या ’ या संग्रहातील कविता लिंबोळ्यांप्रमाणेच कडवट गोड आहेत. या कविता म्हणजे कवीच्या उच्च काव्यप्रतिभा आहेत.
- अनंत फंदी
अनंत फंदी या कवीने मराठीत फटका हा काव्यप्रकार, सामान्य जनतेला उपदेश करण्यासाठी रूढ केला.
- अनंत फंदी परिचय
अनंत फंदी या कवीने मराठीत फटका हा काव्यप्रकार, सामान्य जनतेला उपदेश करण्यासाठी रूढ केला.
- दमयंती स्वयंवर
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ३
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ४
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ५
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ६
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ७
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ८
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ९
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १०
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ ११
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १२
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १३
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १४
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १५
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १६
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १७
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १८
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ १९
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २०
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २१
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २२
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २३
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २४
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २५
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- दमयंती स्वयंवर - पृष्ठ २६
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- रघुनाथ पंडित
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुन..
- रघुनाथ पंडित - रामदास- वर्णन
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- रघुनाथ पंडित - गजेंद्र मोक्ष
रघुनाथ पंडित यांच्या काव्यात इतके माधुर्य व इतका रस आहे की, ते आरंभापासून शेवटापर्यंत वाचल्यावाचून मनाची तृप्ति होत नाही व एकदा वाचले म्हणजे पुनः ..
- सगनभाऊ - लावणी संग्रह : १
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - प्राणसख्या प्रियकरा करा श...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - अर्ज विनंती ऐका लोभ हा सा...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नवे पाखरू जा गबरुहि लवा ।...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - ऋतु चौथा गे बाई ॥ तारु...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - असी किरे प्रित वाढल किर्त...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - मज पापिणीची दृष्ट सख्याला...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नाजुक माझे आंग नवि नवती ।...
चाल - आधिच छबेली सुरत त्यावर तुमची (राग ललतागारी)
- सगनभाऊ - सुख असता दुःख मज देता मी ...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - तुसी जो स्नेहसंग करिल बुड...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - आम्ही न बोलू आजपुन गडे फि...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नाव तुझे साळू चल आज खेळू ...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - सुख असल्यावर दिना सारिखे...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - चंद्राचे चांदणे सितळ का ऊ...
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - कबूली जबाब
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - माझ्या हरा
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - कस्तुरीचा सुगंध
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - निवाडा
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - चांदण्यातील विरह
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - मुषाफर
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - पिवळी सुंदरा
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - शकुनवंतीची याचना
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - न्हाताना
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - राव सिदगाव करा
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - काय म्हुन घातलीस आण
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नार चंचल मनि घाबरी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - राग आणि त्यांचे सांत्वन
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - मय तो जोगिन होउंगी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - जळ्या लागला काय हो वहेनी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - उचलुन कडेवर का घ्याना
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - भेट करवा प्राणपतिची
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नाव तुझे जयना
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - त्याचे न माझे सैंवर झाले
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नवीन आलिसं पहाण्यांत
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - मी वचनि विकली जाइन तुमच्या करी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - बाहार खुदा विसर गये
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - गोरे गाल मजा पहाल
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - झाला हो वनवास
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - पराक्रमासारखी प्रीत करा
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - आले माहेरचे पत्र
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - बोलणे मंजुळ मैनाचे
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - सखा रुसला जाते घरी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - जलभरके प्यारी उठे
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - मी तर कळी कि जाईची
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - उत्तरचा रहिवाशी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - जाळा वाचुन कड येईना
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - विनंती अर्ज
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - मनात हसले ग बाई हसले
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नावडतिची साखर अळणी
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - कशि जाउ सखे यात्रेला
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - तुझ्या आंगी इष्काच्या कळा
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - नवी होती का जुनी होती?
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - ये मन मोहना
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - माझी ओटी भराग
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - सुख आठवीन पतिचे
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - किने घुंगर बजाया
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- सगनभाऊ - परिचय
सगनभाऊंची लावणी म्हणजे मराठी साहित्याला पडलेले लावण्यरूप स्वप्नच.
- केशवस्वामींची कविता
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जाग..
- श्रीकेशवस्वामी - प्रस्तावना
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - मंगलाचरण
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ३
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ४
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ५
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ६
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ७
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ८
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ९
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १०
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ११
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १२
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १३
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १४
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १५
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १६
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १७
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १८
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग १९
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २०
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २१
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २२
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २३
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २४
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २५
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २६
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २७
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २८
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग २९
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- श्रीकेशवस्वामी - भाग ३०
केशवस्वामींनी मनोभावेंकरून आपल्या कार्यातून हिंदू जनतेस त्यांच्या ठिकाणी आपला धर्म, आपला देश, आपली संस्कृती, आपली भाषा इत्यादिकांसंबंधी जागॄत केले..
- समग्र कविता - संग्रह १
भा. रा. तांबे परिचय
Briefly about B. R. Tambe
- कुस्करूं नका हीं सुमने !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- झरा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- डोळे हे जुलमि गडे !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- जगाहून भिन्न
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- तुजवीण
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- विधवेचें स्वप्न
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- मार्गप्रतीक्षा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- चिंवचिंव चिमणी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- पुंगीवाला
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- यापरी असे जीवन
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- ठावा न सुखाचा वारा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- गुराख्याचें गाणें
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- कांतेस
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- ती रम्या जननी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- संध्यातारक
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- घटोत्कच माया
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- आशा, शब्द आणि दर्शन
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- सत्प्रीतिमार्ग
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- वदन मदनरंगसदन
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- कां रे जाशी मज त्यजुनी ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- तीनी सांजा सखे, मिळाल्या
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- बुल्बुलास
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- ह्रदय सांग चोरिलें कशास सुंदरी ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- तूं जिवलगे विद्यावती जाणती !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- तारूण्यांतील एक प्रसंग
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- चिरंजीव कोण ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- बिजली जशि चमके स्वारी !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- प्रेममाहात्म्य
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- हिमाच्छन्न सरिता
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- मुशाफिर आम्ही
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- सान्त्वन
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- ये पहाटचा वर तारा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- प्रीतीचा वास
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- सखये, या स्थानीं
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- दुष्काळानंतरचा सुकाळ
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- चौघडा झडतो
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- हा आणि तो
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- कुपित अंगनेप्रत
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- संदिग्ध ताना
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- कळ्याकळ्यांत विहार
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- क्रुद्ध सुंदरीस
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- शैशवदिन जरि गेले निघुनी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- अजुनि लागलेंचि दार
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- पाडवा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- वियोगिनी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- सृष्टिशिक्षण
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- प्रणयवंचिताचे उद्गार
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- आठवती ते दिन अजुनी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- कालाच्या चढुनी श्रमें-
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- ललने चल चल लवलाही !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- गेली ज्योति विंझोनिया
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- शुक्राची चांदणी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- राजकन्या आणि तिची दासी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- आनंदी आनंद !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- क्षिप्रा-चमळासंगम
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- हें कोण गे आई ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- रासमंडळ गोपीचंदन
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- आईकडे न्या !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- तर मग गट्टी कोणाशीं ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- शिशुवंचन
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- गतकाल
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- अंधारांतून डोकावणारीं मुखें
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- काळेभोर विशाळ केस
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- पन्नास वर्षांनंतर
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- निःशब्द आत्मयज्ञ
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- समग्र कविता - संग्रह २
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- मातृभूमीप्रत
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- आलें तुझ्या रे दारीं नृपा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- रे चेटक्या !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- प्रभु, तुज कवणेपरि ध्याऊं ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- रे मानसहंसा !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- अनंत-स्तोत्र
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- सामाजिक पाश
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- कोठे शांति, तुझा निवास ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- शांतिनिवास
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- चल जळो ज्ञानविज्ञान गड्या !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- जीवसंयोग
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- प्रणयप्रभा
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- कुणी कोडें माझें उकलिल का ?
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- जीवनसंगीत
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- मग विसर हवा तर हा क्षण गे !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- लोकमान्यांस
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- घट भरे प्रवाहीं बुडबुडुनी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- बघुनि तया मज होय कसेंसें !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- गौप्यमान
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- भयचकित नमावें तुज रमणी !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- प्रेमरत्नास
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- तें दूध तुझ्या त्या घटांतलें
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- नववधू प्रिया, मी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- पावलोपावलीं साउलि ही !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- क्षण सुवर्णकण झाले रमणा !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- घन तमीं शुक्र बघ राज्य करी !
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- सोन्याची घेउनि करिं झारी
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- आह्रानशृंग
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- मंदिरीं मना, तव गान भरे
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात
- या प्रकाशशिखरीं
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- रे अजात अज्ञात सखे जन !
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- गोंधळाचें घर
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- या वेळीं माझ्या रे रमणा !
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- गे शपथ तुझी !
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- नटेश्वराची आरती
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- घातली एकदा अतां उडी !
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- रुद्रास आवाहन
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- उद्यांची गति
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- पोशाख नवनवा मला दिला !
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- महा-प्रस्थान
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- घाबरूं नको, बावरूं नको !
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- आलों, थांबव शिंग !
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- जन पळभर म्हणतिल, 'हाय हाय !'
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- निरोप घेतांना
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- मरणांत खरोखर जग जगतें !
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- उदार चंद्रा !
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- गाडी बदलली !
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- किति महामूर्ख तूं शहाजहां !
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- जीवितसाफल्य
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- आज तो कुठे जिवाचा चोर ?
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- स्वारी कशी येईल ?
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- वैरिण झाली नदी !
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- निजल्या तान्ह्यावरी
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- कळा ज्या लागल्या जीवा
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- जन म्हणती सांवळी !
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- फेरीवाला
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- पक्षि पिंजर्यांतुनी उडाला !
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- दृष्ट हिला लागली !
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- विरहांतील चित्तरंजन
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- तुझे लोचन
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- घट भरा शिगोशिग
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- निष्ठुर किति पुरुषांची जात !
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- घट तिचा रिकामा
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- पुनवेची शारद रात
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- कवणे मुलखा जाशी ?
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- समग्र कविता - संग्रह ३
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- रतलें परपुरुषाशीं
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- हिंदु विधवेचें मन
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- दे पूर्ण ह्रदय सुंदरी
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- उखळांत दिलें शिर ! काय अतां !
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- दरडीवरील बाला
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- अंगाई गीत
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- मिळे ग नयनां नयन जरी
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- समजुनि बांध शिदोरी
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- अशांचें कोण करिल तरि काय ?
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- कोण रोधील ?
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- प्रतिज्ञा
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- वसंत फेरीवाला
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- जेव्हां लोचन हे
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- तूं कवण जगांतिल ललना ?
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- रुणुझुणु ये !
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- समज मानिनी !
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- उडाला हंस !
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- नदितिरीं उभी ती
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- ते कांत यापुढें !
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- पहा हो कसा हा कारागीर !
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- वाटलें नाथ हो !
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- सहज तुझी हालचाल
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- केवळ सुखराशी !
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- तृणाचें पातें
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- स्त्रीह्रदयरहस्य
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- सरस्वती-स्तोत्र
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- निशिदिनिं तुज हरि, ध्याइन का मी ?
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- चरणिं तुझ्या मज देईं रे वास हरी !
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- चरण कधीं का पाहिन आई ?
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- वंदन व्हावें हरि, मम जीवित
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- हरि, अर्पावें काय तुला मीं ?
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- कलेचें ह्रद्गत
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- म्हातार्या नवरदेवाची तक्रार
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- जय वाल्मीकी !
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- साम्राज्यवादी
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- कोणिकडे जादुगारिणि ?
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- अजीं ऐका हो सरकार !
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- कशि लाज सोडिशी सारी ?
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- भोग कुणा सुटले ?
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- सखि आली !
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- झांशीवाली
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- रिकामे मधुघट
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- हांक
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- स्त्रीला नमस्कार हा !
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- भैरव
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- एक आकांक्षा
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- वधूवरयोः शुभं भवतु !
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- अवमानिता
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- कां उभी तूं तरी !
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- फसवणूक
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- अहो धन्वंतरी !
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- माळीण
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- गति कशी व्हावी ?
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- गति कशी व्हावी ?
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- स्फुट ओव्या
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- जोगी घेतला जोग
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- माहेरची आठवण
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- माझ्या अंगणांत
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- लाजूं नको ताई !
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- वाटेच्या वाटसरा
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- आज फिरुनि कां दारिं ?
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- ये पहाटचा तारा गगनीं
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- प्रिया हेंच सर्वस्व !
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- कुणि असेल ग !
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- दिव्यांगनेची ओढ
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- पूर्णाहुति
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- समग्र कविता - संग्रह ४
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- दुर्गा
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- चरणाखालिल हाय मीच रज !
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- कवनकमळें
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- मेनकावतरण
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- जय रतिपतिवर !
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- शरणागत
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- चुकला बाण
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- मावळत्या सूर्याप्रत
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- घर राहिलें दूर !
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- पाणपोईवाली
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- वारुणीस्तोत्र
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- जमादार
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- ग्रीष्म
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- विरहांतील जीवन
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- आज पारणें कां फिटलें ?
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- चौकीदार
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- तें कोण या ठायिं ?
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- वायो, खुणव तीस
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- संगीत कलेप्रत
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- तरुणांस संदेश !
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- शुभं भूयात्
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- कोठें मुली जासि ?
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- पुनः पुनः यावें
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- तुझे चरण पाहिले
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- राजद्रोह कीं देशद्रोह ?
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- भा. रा. तांबे
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- भा. रा. तांबे परिचय
भा.रा.तांबे यांच्या कविता अत्यंत हळुवार असून त्या मनाला भिडतात.
- वामन पंडित
वामन पंडितांच्या काव्य रचना म्हणजे मराठी काव्य प्रकारातील मैलाचे दगड होत.
- वामन पंडित - कर्मतत्व
'कर्मतत्व' काव्यात वामनपंडितांनी कर्माचे महत्व भावपूर्णतेने सांगितले आहे.