हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।
स्यामा स्याम पद पावैं सोई ।
मन-बच-क्रम करि सदा नित्य जेहि हरि गुरु पदपंकज रति होई ॥१॥
नंदसुवन वृषभानुसुता पद भजै तजै मन आनै जोई ।<..