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गणपतीची आरती - विघ्नांत विघ्नेशा हे गजान...


Ganapati Arati - Prayer to Lord Ganesha गणपतीची आरती - विघ्नांत विघ्नेशा हे गजानन

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गणपतीची आरती

विघ्नांत विघ्नेशा हे गजानना ।
आरती मी करितों तुज पुरवि कामना ॥ धृ. ॥

भाद्रपदी शुद्ध चतुर्थीस तव बरी।
मूर्ति करुनि सर्व लोक पूजिती घरी॥
महिमा तव वर्णवे न पापगिरि हरी॥ येई ॥
घाई पाहीं करुनि त्वरा। विघ्नहरा। दे सुगिरा। हे कृपाधना ॥ विघ्ना. ॥ १ ॥

संकटि जे पडुनि प्रभो स्मरती तुजला ।
मुक्त करिसी जगती या खचित त्यांजला ॥
जाणुनि हे तव भजनीं ध्यास लागला ॥
गातो। नमितो। तारि आतां। या भक्ता। दयावंता। गौरिनंदना ॥ विघ्नां ॥ २ ॥

Translation - भाषांतर

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