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भारुड चिरंजीवपद चिरंजीवीपद पावावयासी । अध भारुड भांड माया छांड सुनोजी । आछा भा
भारुड - बुलबुल - लखो बुलबुल है । दावोजी मु...


भारुड Bharude is a kind of satirical form of presenting the faults of lay human beings. It was started by Eknath who is revered as a saint.

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भारुड - बुलबुल

लखो बुलबुल है । दावोजी मुबारखो ॥ ध्रु० ॥

झटा तेरा जप भात रोटी गप । सद्‍गुरुमें छप । तुझ काल करेगा गप ॥ १ ॥

लगो मुख लिया नाम । आंदर भरा है काम । ऐसा केंव हुवा बेफाम । तुझ कांहा मिलेगा राम ॥ २ ॥

मोकूं आंगकूं लगाया राख दिलमो नापाक । ऐसा देखे लख । एका जनादर्नीं देख ॥ ३ ॥

Translation - भाषांतर

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