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भारुड - नानक - अल्ला रखेगा वैसा भी रहेना...


भारुड Bharude is a kind of satirical form of presenting the faults of lay human beings. It was started by Eknath who is revered as a saint.

 



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भारुड - नानक

अल्ला रखेगा वैसा भी रहेना ।

मौला रख्खेगा वैसा भी रहेना ॥ धृ. ॥

कोई दिन सिरपर छतर उडावे ।

कोई दिन सिरपर घडा चढावे ।

कोई दिन तुरंग उपर चढावे ।

कोई दिन पावस खासा चलावे ॥ १ ॥

कोई दिन शक्कर दूध मलिदा ।

कोई दिन अल्ला मारता गदा ।

कोई दिन सेवक हात जोड खडे ।

कोई दिन नजिक न आवे धेडे ॥ २ ॥

कोई दिन राजा बडा अधिकारी ।

एक दिन होय कंगाल भिकारी ।

एका जनार्दनी करत कर तारी ।

गाफल केंव करता मगरूरी ॥ ३ ॥

Translation - भाषांतर

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